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कृषि/बागवानी

मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना लिख रही सुरक्षित खेती की नई इबारत

मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना लिख रही सुरक्षित खेती की नई इबारत

हमीरपुर। मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना हिमाचल में सुरक्षित खेती की नई इबारत लिख रही है। किसी समय जंगली जानवरों व बेसहारा पशुओं के उत्पात के कारण खेती छोड़ चुके किसान अब दोबारा फसल उत्पादन की ओर लौटे हैं। योजना के तहत पूरे प्रदेश सहित हमीरपुर जिला में भी सोलर फैंसिंग व कांटेदार तार के माध्यम से बाड़बंदी कर फसलों का संरक्षण सुनिश्चित किया गया है। इस योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत सोलर बाड़बंदी के लिए 80 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जा रहा है। वहीं किसान समूह आधारित बाड़बंदी के लिए 85 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। योजना में कांटेदार व चेन लिंक बाड़बंदी भी शामिल की गई है, जिस पर 50 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध है। इसी प्रकार कम्पोजिट बाड़बंदी पर 70 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।

किसानों की जमीन की कुर्की का सच सामने आया, सुप्रीम कोर्ट ने कहा...

किसानों की जमीन की कुर्की का सच सामने आया, सुप्रीम कोर्ट ने कहा...

नई दिल्ली, 13 जनवरी। देश की सर्वोच्च न्यायालय में कल हुई सुनवाई के दौरान किसानों की जमीन की बिक्री या यूं कहें की कुर्की का सच सामने आया ही गया। सुनवाई के दौरान किसानों के वकील ने सुप्रीम अदालत के समक्ष इस तथ्य को रखा कि कॉन्ट्रैक्ट खेती के दौरान उपज खराब होने पर किसान को अपनी जमीन तक भी बेचनी पड़ सकती है। जिस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि हम किसानों की जमीन की रक्षा करेंगे। हम यह कहते हुए एक अंतरिम आदेश पारित करेंगे कि संविदा खेती के लिए किसी भी किसान की जमीन नहीं बेची जा सकती है। इससे पहले किसान नेता संजय पराते अपने एक लेख में इस बात को बखूखी उठा चुके हैं कि कैसे और किस धारा के तहत किसान अपनी जमीन से हाथ खो सकते हैं।

मुर्गी पालक बर्ड फ्लू से बचाव के लिए करें ये उपाय

मुर्गी पालक बर्ड फ्लू से बचाव के लिए करें ये उपाय

धर्मशाला(कांगड़ा), 07 जनवरी। पशु चिकित्सा अधिकारी रानीताल डॉ.सर्वेश गुप्ता ने मुर्गियों को बर्ड फ्लू से बचाने के लिए लोगों से प्रांरभिक रोकथाम व नियंत्रण के उपाय करने की अपील की है। डॉ.गुप्ता ने बताया कि लोग फार्म व बाड़े में जाने के लिए अलग जूते या चप्पलों का इस्तेमाल करें। फार्म या बाड़े के बाहर फृटपाथ बनाएं जिन्हें फिनाईल, फॉरमलिन या कीटाणु नाशक घाल का प्रयोग करें या फुटपाथ में चूने का प्रयोग भी किया जा सकता है। फार्म या बाड़े में जाने से पहले अपने हाथ साबुन से धोकर जाएं। फार्म या बाड़े के चारों तरफ नियमित रूप से चूने का छिड़काव करें।

बागवान अलर्ट: कोहरे से बचाव को फलों के पौधों पर करें पानी का छिड़काव

बागवान अलर्ट: कोहरे से बचाव को फलों के पौधों पर करें पानी का छिड़काव

धर्मशाला(कांगड़ा), 5 जनवरी।  उप निदेशक, बागवानी आर.एस.नेगी ने ज़िला के बागवानों का आह्वान करते हुए कहा कि कोहरे के कारण होने वाले नुक्सान से बचने के लिए पौधों पर पानी का छिड़काव किया जाए। उन्होंने बताया कि सर्दी के मौसम में मैदानी क्षेत्रों में कोहरा पड़ना आम बात है लेकिन कोहरे की बजह से पौधों पर पड़ने वाले प्रभाव को रोकना आवश्यक होता है। कोहरे का प्रभाव बेहतर प्रबन्धन से कम किया जा सकता है जिसमें पौधों को पहुंचने वाले नुक्सान को कम किया जा सके।


कम पैसे से शुरू कर बढ़ाया जा सकता है मशरूम का व्यवसाय

कम पैसे से शुरू कर बढ़ाया जा सकता है मशरूम का व्यवसाय

करनाल 2 जनवरी। महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल के कुलपति प्रो. समर सिंह ने बताया कि फसल विविधिकरण में मशरूम एक ऐसा व्यवसाय है जो कम पैसे से शुरू किया जा सकता है और सफल होने पर मशरूम उत्पादन को किसी भी स्तर पर बढ़ाया जा सकता है। विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय खुम्ब अनुसंधान केन्द्र जोकि मुरथल में स्थित है जोकि पहले हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अंतर्गत कार्य कर रहा था, अब इसका स्थानांतरण विश्वविद्यालय में कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी पूरी कोशिश होगी कि इस सेंटर को अंतरराष्ट्रीय स्तर के रूप में विकसित किया जाए।

खेतों में फिर से लहलहा रही है दस हजार साल पुरानी लाल चावल की खेती

खेतों में फिर से लहलहा रही है दस हजार साल पुरानी लाल चावल की खेती

ऊना, 13 दिसंबर।  हिमाचल प्रदेश में विलुप्त होने की कगार पर पहुंची लाल चावल की फसल अब फिर से लहलहाने लगी है। इस बारे जानकारी देते हुए कृषि मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने बताया कि मानव जाति द्वारा अपनी उत्पति के आरंभिक काल के दौरान खाद्यान्न के रूप में उपभोग की जाने वाली लाल चावल की फसल लगभग दस हजार वर्ष पुरानी आंकी जाती है। 

जाइका ने दिखाई राह, नकदी फसलें उगाकर कमा रहे आजीविका

जाइका ने दिखाई राह, नकदी फसलें उगाकर कमा रहे आजीविका

हमीरपुर 12 दिसंबर। किसानों की आय बढ़ाने और युवा पीढ़ी को खेती के लिए प्रेरित करने हेतु हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में आरंभ की गई जाइका परियोजना के बहुत ही अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। जाइका परियोजना के माध्यम से फसल विविधीकरण को अपनाकर खेती की तस्वीर बदलने वाले विभिन्न जिलों के गांवों की फेहरिस्त में अब हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के विकास खंड भोरंज का छोटा सा गांव झिनिकरी भी शामिल हो गया है। कभी पानी की कमी से जूझने वाले इस गांव के खेतों में भी अब नकदी फसलें लहलहाने लगी हैं और इससे गांव के कई किसानों की वार्षिक आय तीन से साढे तीन गुणा तक बढ़ गई है।

यहां उगी साढ़़े तीन किलो की एक अरबी

यहां उगी साढ़़े तीन किलो की एक अरबी

जलाड़ी, 11 नवंबर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक खेत में साढ़े तीन और ढाई किलो की अरबी पैदा हुई है। इतनी बडी देखकर हर कोई हैरान है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनेगी प्राकृतिक प्रकोपों पर किसानों का सहारा, देखें कैसे

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनेगी प्राकृतिक प्रकोपों पर किसानों का सहारा, देखें कैसे

ऊना 6 दिसंबर। कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकतम आबादी की आजीविका कृषि व कृषि संबद्ध गतिविधियों पर ही आश्रित है। सरकार द्वारा किसानों को कृषि पद्धति में स्वदेशी ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक ज्ञान, आधुनिक कृषि उपकरणों को भारी अनुदान पर उपलब्ध करवाने तथा खेत की तैयारी, खेत का चुनाव, खरपतवार नियंत्रण, पौध सरंक्षण, फसलोत्तर प्रबंधन, फसल की कटाई, मृदा जांच इत्यादि प्रत्येक पहलु के प्रति जागरुकता लाने के लिए कई प्रोत्साहनवर्धक योजनाएं कार्यान्वित की हैं। 

जाईका परियोजना लाई देशराज के जीवन में खुशहाली

जाईका परियोजना लाई देशराज के जीवन में खुशहाली

घर से दूर नौकरी-व्यवसाय के लिए जहां-तहां भटकने के बजाय अपनी जमीन पर ही कुछ मेहनत करके तथा सरकार की योजनाओं की मदद से आज का युवा अपने खेतों में भी सोना उगा सकता है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी यानि जाईका की सहायता से चलाई जा रही हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना ऐसे युवाओं और आम किसानों के लिए बहुत ही मददगार साबित हो रही है। यह परियोजना हमीरपुर जिला की नादौन तहसील के गांव बेहा के प्रगतिशील किसान देशराज की जिंदगी में भी खुशहाली लेकर आई है। कभी प्राईवेट सैक्टर में नौकरी के लिए भटकने वाले देशराज आज जाईका परियोजना का लाभ उठाकर न केवल घर में ही लाखों की आय अर्जित कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने कृषि आजीविका और रोजगार सृजन का एक नया मॉडल भी स्थापित किया है।

मुख्यमंत्री से की वूलफेड के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट

शिमला, 4 नवंबर। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर से आज यहां वूलफेड के अध्यक्ष त्रिलोक कपूर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की तथा उन्हें प्रदेश के पाॅलीबायोनिक टेक्नाॅलाॅजी वाले जैविक उत्पादों के निर्यात की कार्य योजना के बारे अवगत करवाया।

'कोहला कूहल' से सालों बाद संभव हुई धान की खेती

'कोहला कूहल' से सालों बाद संभव हुई धान की खेती

काँगड़ा ज़िला के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत, अप्पर लंज के क़रीब 60 परिवारों के लिए राज्य सरकार के जल शक्ति विभाग द्वारा निर्मित ‘कोहलाञ कूहल ख़ुशियों की सौग़ात लेकर आई है। कोहला कूहल के बनने से अप्पर लंज में सालों बाद धान की खेती का पुनर्जीवन संभव हो पाया है। पंचायत प्रधान ओंकार सिंह बताते हैं कि आज से कई साल पहले लंज पंचायत के लोग कोहला क्षेत्र में गज खड्ड में अस्थाई बॉंध बनाकर अपने खेतों में गेहूँ, धान तथा सब्ज़ियाँ आदि उगाते थे। लेकिन प्रकृति के साथ होने वाली मानवीय छेड़छाड़ का असर धीरे-धीरे गज खड्ड के जलस्तर पर भी दिखने लगा। पानी की उचित व्यवस्था न होने के कारण समय के साथ यहॉं के किसानों ने खेती-बाड़ी करना छोड़ दिया। परिणामस्वरूप ज़मीन खाली रहने लगी। देखते ही देखते सैंकड़ों कनाल ज़मीन बंजर हो गई।

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