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आम आदमी की भड़ास

क्या हमने उत्तराखंड अविनाश आंनद और भजन सिंह के लिए बनाया?

क्या हमने उत्तराखंड अविनाश आंनद और भजन सिंह के लिए बनाया?

दिसम्बर 2019 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मीडिया को बताया था कि आस्टेªलिया से 240 मेरिनो भेड़ लाई गयी हैं। इन भेड़ों में 200 फीमेल और 40 मेल थीं। कापड़ीधार में इनको रखा गया है। इनको भारत लाने में 8.5 करोड रुपये का खर्च आया। उद्देश्य था कि ऊन का व्यवसाय बढ़ेगा, किसानों की आय और भेडों की नस्ल भी सुधरेगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के पत्र से अब पता चल रहा है कि अधिकांश भेड़ों में प्रजनन की क्षमता ही नहीं है। शीप एडं वूल डिवलेपमेंट बोर्ड भेड़ों के व्यव

त्रिवेंद्र चचा जागो! करवट बदलने लगा है पहाड़

त्रिवेंद्र चचा जागो! करवट बदलने लगा है पहाड़

इस रविवार को चमोली जिले के नंदप्रयाग-घाट में जो हुआ, वह पहाड़ की बेचैनी को दिखाता है। सड़क को डेढ़ लेन करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने 19 किलोमीटर लंबी मानव श्रंृखंला बना कर विरोध प्रदर्शन किया। इसमें 70 गांवों के सात हजार ग्रामीणों ने भाग लिया। ग्रामीणों के अनुसार त्रिवेंद्र चचा ने इस सड़क को दो साल पहले डेढ़ लेन करने की घोषणा की थी लेकिन अब तक वादा पूरा नहीं किया। इस कारण ग्रामीणों में आक्रोश है।

निकट भविष्य में गरीबों को इलाज के लिए बेचने होंगे गुर्दे-फेफड़े!

निकट भविष्य में गरीबों को इलाज के लिए बेचने होंगे गुर्दे-फेफड़े!

प्रदेश के मुखिया के साथ स्वास्थ्य मंत्री, वित्त मंत्री समेत तीन दर्जन से अधिक विभागों का दायित्व संभाल रहे सीएम यानी हमारे त्रिवेंद्र चचा सकुशल एम्स से डिस्चार्ज हो गये हैं। देवभूमि के लोगों की दुआएं असर कर गयी। फिलहाल वो दिल्ली में ही रुकेंगे। ठीक भी है बार-बार दिल्ली जाने में तेल खर्च होगा। इस बीच सरकार द्वारा पौड़ी जिला अस्पताल, जिला महिला चिकित्सालय पौडी और सीएचसी घंडियाल और पाबौ को पीपीपी मोड पर दिये जाने की सूचना है। मेरा निवेदन यह है कि जब दून अस्पताल समेत पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पताल रेफरल सेंटर बन गये हैं तो दून अस्पताल को भी पीपीपी मोड पर दे देना चाहिए। बेकार में गरीबों के लिए यहां इलाज की उम्मीद तो नहीं रहेगी।

लो जी, खुल गई कोरोना से जंग की तैयारियों की पोल

लो जी, खुल गई कोरोना से जंग की तैयारियों की पोल

कोरोना से जंग को लेकर केंद्र से लेकर राज्य सरकार ने लाखों दावे किये। करोड़ों खर्च किये, कोरोना पीड़ितों के लिए आइसोलेशन वार्ड, बेड, वेंटीलेटर और तमाम सुविधाएं देने का दावा किया। लेकिन इन दावों की हवा आज सुबह निकल गयी। कोरोना संक्रमित त्रिवेंद्र चचा को थोड़ा बुखार आया और फेफड़ों में मामूली इंफेक्शन हुआ। यह बात उनके डाक्टर एनएस बिष्ट ने बतायी। ठीक है उनका दून अस्पताल में भर्ती होना जरूरी था। वो हुए भी। इसके बाद यदि उन्हें दून अस्पताल के स्वयं पर किये गये प्रबंध और अपने डाक्टरों पर यकीन नहीं था तो एम्स ऋषिकेश जाते। 

इन बेसहारा गऊओं की मन की पीड़ा भी सुन लो सरकार

इन बेसहारा गऊओं की मन की पीड़ा भी सुन लो सरकार

आज जहां पूरा देश यशस्‍वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात सुन रहा था, तो इसी बीच मां बज्रेश्‍वरी की नगरी कांगड़ा में एक बेसहारा गाय दर्द से कराहती सड़कों पर किसी चिकित्‍सीय मदद की पीड़ा लिए घुम रही थी। इस बेजुवान के दर्द को देखते हुए लेखक ने जानवरों की मदद के नाम पर सोशल मीडिया में वाहवाही बटोरने वाली कुछ संस्‍थाओं से संपर्क की नाकाम कोशिश की, फिर शहर में ही किसी के जरिए पशु चिकित्‍सक को खोजना चाहा, मगर सारी कोशिशें बेकार साबित हुईं।

गृहमंत्री शाह ने जिसके घर खाना खाया, उसे एक शब्द भी नहीं कहा

गृहमंत्री शाह ने जिसके घर खाना खाया, उसे एक शब्द भी नहीं कहा

बड़े नेता वोट हथियाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। राहुल गांधी ने कलावती के घर भोजन किया। आज कलावती कहां है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन सफाई कर्मचारियों के पैर धोए, उनके क्या हालात हैं और अब पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में शांतिनिकेतन के बाउल कलाकार बासुदेब दास के घर गृहमंत्री अमित शाह ने भोजन कर वाहवाही बटोरी, लेकिन उन्होंने बासुदेव से एक शब्द भी बातचीत नहीं की। खाना खाया और चल दिये। मैं पहले ही कह चुका हूं कि राजा का काम प्रजा जैसा भोजन करना नहीं है। राजा का काम है कि उसकी नीतियां ऐसी हों कि प्रजा भी राजा की तरह खाना खा सके।

यदि अटल होते तो क्या किसान यूं ही सड़कों पर होते?

यदि अटल होते तो क्या किसान यूं ही सड़कों पर होते?

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की कल जयंती थी। अटल जी का हृदय विशाल था और वो राजनीति में विपक्षियों की भी सुनते थे और उनको पूरा सम्मान देते थे। यही कारण है कि जब 1992 में यूएनओ में भारत की बात रखी जानी थी तो कांग्रेस की नरसिंह राव सरकार ने किसी कांग्रेसी नेता को भेजने की बजाए अटल जी को कहा कि आप विश्व मंच पर भारत की बात रखें। 1977 में जब अटल जी विदेश मंत्री बने और इंदिरा गांधी को खतरा था कि इमरजेंसी के बदले में कहीं जनता उनकी या उनके परिवार पर हमला न कर दें तो अटल जी सबसे पहले इंदिरा जी के घर गये और उनको पूरी सुरक्षा का आश्वासन दिया। तब ऐसे होती थी राजनीति।

सब जानते हैं गुनाहगार कौन? तो जांच किस बात की, जनाब!

सब जानते हैं गुनाहगार कौन? तो जांच किस बात की, जनाब!

ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर गूलर के निकट निर्माणाधीन 90 मीटर पुल गिरने से एक मजदूर की मौत हो गयी। दूसरा वेंटीलेटर पर है, यानी उसके बचने की संभावनाएं क्षीण हैं। अन्य 12 बुरी तरह जख्मी हैं। सीएम ने दुख जताया, जांच के आदेश मुख्य सचिव को दिये। मुख्य सचिव ने डीएम को दिये, डीएम ने मजिस्टेªटी जांच बिठा दी। जांच लंबे समय तक चलेगी। सब जानते हैं कि गुनाहगार कौन है तो जांच किस बात की? स्पष्ट है कि चारधाम यात्रा मार्ग के टेंडर उत्तराखंड की कंपनियों को मिले ही नहीं। बाहर की कंपनियों को टेंडर दिये गये। कारण, अच्छे ठेकेदार तो अत्याधुनिक मशीनें, अच्छे इंजीनियर और वैज्ञानिक तरीके से पहाड़ो का कटान। लेकिन कहा जा रहा है हादसे के वक्त की मजदूरों के सिर पर हेलमेट भी नहीं था, अन्य सुरक्षा की बात क्या करें। ये वही ठेकेदार है जिसने देहरादून में आईएसबीटी फ्लाईओवर बनाया। 

हरक सिंह रावत को मंत्री बने रहने का हक नहीं

हरक सिंह रावत को मंत्री बने रहने का हक नहीं

त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार की जीरो टोलरेंस सरकार कर्मकार बोर्ड घपला उजागर होने के बावजूद कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर टोलरेंस क्यों बरत रही है, यह सवाल आम जनमानस कर रहा है। इससे साफ संदेश जा रहा है कि प्रदेश सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। कर्मकार बोर्ड के अध्यक्ष पद से हरक सिंह रावत को हटाए जाने से स्पष्ट हो चुका है कि बोर्ड में अनियमितता हुई है। मामले की जांच महालेखाकार कार्यालय यानी एजी को सौंपी गई है तो सरकार के पास पुख्ता प्रमाण हैं कि बोर्ड में सबकुछ ठीक नहीं है। जब त्रिवेंद्र सरकार ने हरक सिंह को बोर्ड अध्यक्ष पद से हटा दिया तो उन्हें नैतिकता के आधार पर कैबिनेट में बने रहने का हक नहीं है। चूंकि राजनीति में अब नैतिकता बची ही नहीं है, इसलिए जांच पर जांच होगी और ये जांच कभी समाप्त नहीं होगी।

ओ भ्रष्ट नेताओं-अफसरों, जरा गौर से सुनो

ओ भ्रष्ट नेताओं-अफसरों, जरा गौर से सुनो

हमने सुदूर गांव तक विकास का सपना देखा, विकास की उत्कंठा हिलोरे मार रही थी, नवाबों की नगरी लखनऊ हमारी पीड़ा नहीं समझ रही थी। तब हम अलग राज्य को हासिल करने के लिए पहाड़ की पगडंडी से दिल्ली की सड़कों तक उतरे, लाठी-गोली खाई, जेल गये, अस्मिता गंवाई, सर्वोच्च बलिदान दिया। तुम सोचते हो, इस बलिदान को हम यूं ही व्यर्थ जाने देंगे? नहीं। तुम यूं ही हमारे राज्य को, हमारे सपनों को कुचल नहीं सकते अपनी साजिशो से।

आज मुझे मिल गया विकास

आज मुझे मिल गया विकास

आज मैं दून यूनिवर्सिटी में कर्नल देव डिमरी की पुस्तक विमोचन में गया था। यूनिवर्सिटी के गेट के निकट ही राजस्व विभाग की आवासीय कालोनी के गेट पर अचानक मुझे विकास मिल गया। मैंने पूछा भाई क्या हाल हैं। उसने कहा मजे में हूं, ठेकेदारों और अफसरों की जेब में हूं। जनता की आंखों में सपने सा हूं और पैरों में कांटे सा चुभ रहा हूं।

हां, अब हमें किसी से कोई मतलब नहीं!

हां, अब हमें किसी से कोई मतलब नहीं!

ये फोटो जिस वीडियो से लिया गया है वो हरियाणा के फरीदाबाद जिले में अग्रवाल कालेज के सामने का है। जिसने वीडियो बनाया वो भी देखता रहा और जो वहां से गुजरे वो भी इस घटना को नजरअंदाज कर निकल गए। वीडियो में साफ है कि जब हमलावर लड़की को खींच रहा था और पिस्तौल निकाल रहा था तो लोग आस-पास बेखर जा रहे थे। यदि इन लोगों ने ही शोर-मचाया होता तो निकिता की जान बच जाती। हमलावर तौफिक ने निकिता तोमर को पहले किडनेप करने की कोशिश की, लेकिन बाद में गोली मार कर हत्या कर दी। दोनों 12वीं तक एक साथ पढ़ाई करते थे। पुलिस ने आरोपी तौफिक को गिरफ्तार कर लिया है।

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