बिलासपुर चंबा हमीरपुर कांगड़ा किन्नौर कुल्लू लाहौल-स्पीति मंडी शिमला सिरमौर सोलन ऊना
ताज़ा ख़बरें
कोरोनाः 477 संक्रमित, 227 मरीज हुए ठीककोरोनाः बिना मास्क के घूमने वालों के काटे चालानसंगीत की ताकत बताती है एआर रहमान की फिल्म 99 SONGS ; पढ़ें रिव्यू, देखें फिल्मकोरोनाः 10 हारे जिंदगी की जंग, कुंभ से लौटे 8 श्रद्धालुओं समेत 971 नए मामलेकोरोनाः 1 नया मामला आयाIPL 2021: वॉर्नर-जॉनी की शानदार पारी काम नहीं आई, मुंबई से 13 रन से हारा हैदराबादहमीरपुर: 69 लोग निकले कोरोना पाॅजिटिवकांगड़ा: कोरोना से तीन की मौत, 258 नए संक्रमित मिलेसीएम ने कोरोना से लड़ाई में उद्योगपतियों का सहयोग मांगाभाषा, शास्त्री व कला अध्यापक के लिए भूतपूर्व सैनिक आश्रित करें आवेदनशुद्ध हवा और जल की उपलब्धता में वन संपदा महत्वपूर्ण: डीसी चंबाराज्यपाल ने कोविड वैक्सीन की दूसरी खुराक ली अप्रेंटिस के 100 पदों पर भर्ती करें आवेदनपंचायतों में जल संग्रहण तालाब बनाने को विभाग तैयार करे योजना:डीसीहोम आईसोलेट मरीजों की स्वास्थ्य मापदंडानुसार नियमित निगरानी हो: सीएमशाहपुर में किया जाएगा इंडोर स्टेडियम का निर्माण:सरवीण चौधरी
संपादकीय

सत्ता मिलते ही वीर चंद्रसिंह गढ़वाली नजर आते हैं कम्युनिस्ट

December 26, 2020 11:08 PM
सत्ता मिलते ही वीर चंद्रसिंह गढ़वाली नजर आते हैं कम्युनिस्ट

- उनके नाम पर वोट बटोरे, लेकिन उन्हें नहीं मिला इंसाफ
- गढ़वाल रेजीमेंट आज भी मानती है अपराधी, मौत होने पर भी नहीं दी सलामी


वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की कल जयंती थी। राज्य गठन के बाद उनके नाम की कई योजनाएं संचालित हैं। चुनाव के समय उनके नाम पर वोट भी बटोरे जाते हैं, लेकिन सत्ता मिलते ही वीर चंद्रसिंह गढ़वाली कम्युनिस्ट बन जाते हैं। भाजपा-कांग्रेस उन्हें राष्ट्र की विरासत से कहीं अधिक वोट बैंक का जरिया मानते हैं।

वो पेशावर कांड के नायक बने थे और आज भी हीरो हैं, लेकिन गढ़वाल रेजीमेंट सेंटर के रिकार्ड में वो आज भी अपराधी हैं। सब जानते हैं कि फौज में देश से बड़ी पलटन होती है। यही कारण है कि जब पेशावर कांड के नायक का निधन हुआ तो गढ़वाल राइफल्स ने उन्हें सलामी देने से इनकार कर दिया। सब जानते हैं कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की आर्थिक हालत कितनी खराब थी कि बैंक ने उनके घर पर कुर्की का नोटिस भी चस्पा दिया था। यदि हेमवती नंदन बहुगुणा उनकी मदद नहीं करते तो मासी सैंणीसेरा का उनका घर कुर्क हो जाता।

यदि हम उनको सच्चा सम्मान देना चाहते तो प्रदेश सरकार विधानसभा में उनको दोषमुक्त करने के लिए कोई प्रस्ताव लाती, ताकि गढ़वाल रेजीमेंट की रिकार्ड बुक से उन पर अपराधी के ठप्पे का हटाया जाता। देश की आजादी के 73 साल और राज्य गठन के 20 साल बाद भी उनको इंसाफ नहीं मिला। इसका मुझे दुख है। पेशावर कांड के नायक को भावभीनी श्रद्धांजलि।

[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से साभार]

Related Articles
कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
और संपादकीय ख़बरें
लोकप्रिय ख़बरें
News/Articles Photos Videos Archive Send News

Himachal News

Email : editor@firlive.com
Visitor's Count : 1,23,83357
Copyright © 2016 First Information Reporting Media Group All rights reserved.
Website Designed by Mozart Infotech