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निर्वासित सरकार

जानें हमारे देश में मौजूद विश्व की एकमात्र निर्वासित सरकार के बारे में, रविवार को विश्व भर में हुई वोटिंग

January 03, 2021 11:08 PM
जानें हमारे देश में मौजूद विश्व की एकमात्र निर्वासित सरकार के बारे में, रविवार को विश्व भर में हुई वोटिंग

मैक्‍लोडगंज(कांगड़ा), 03 जनवरी। विश्‍व के इकलौते निर्वासित लोकतंत्र के चुनावों को लेकर रविवार को दुनिया भर में हलचल रही। यह निर्वासित लोकतंत्र है चीन के जबरन कब्‍जे के बाद से निर्वसित हुए तिब्‍बती समुदाय के लोगों का, जो विश्‍व के सबसे बड़े लोकतंत्र में निर्वासित जीवन जीने के साथ ही यहां की लोकतांत्रितक परंपरा को भी अपनाए हुए हैं।

हालांकि ऐसा कई वर्षों से होता आ रहा है, मगर इस बार खास बात यह है कि दुनिया भर में अपनी विस्‍तारवादी नीतियों के कारण निशाने पर चल रहे चीन के सबसे बड़ा शिकार तिब्‍बती समुदाय पहली बार विश्‍व विरादरी में मजबूती से उभरा है।

अमेरिका द्वारा हाल ही में तिब्‍बती धर्मगुरु दलाईलामा के उत्‍तराधिकारीके चयन में चीन के दखन को रोकने के लिए एक कानून पास किया है। इसे निर्वासित तिब्‍बतियों और धर्मगुरु दलाईलामा की अब तक की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है।

 

उधर,  इस खुशी के बीच रविवार को तिब्बती मतदाताओं ने निर्वासित तिब्बत सरकार का नया प्रधानमंत्री चुनने के लिए पहले चरण के मतदान में भाग लिया। नए निर्वासित प्रधानमंत्री पद के लिए 6 प्रमुख दावेदार हैं। इनमें निर्वासित तिब्बती संसद के उपाध्यक्ष आचार्य येशी फुंचोंक, निर्वासित तिब्बत सरकार की पूर्व गृह मंत्री गेरी डोलमा, निर्वासित तिब्बत संसद के पूर्व अध्यक्ष पेंपा सेरिंग सहित केलसंग दोरजे, लोबसंग न्यांदक, ताशी तोपग्याल शामिल हैं। 

इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के पर्यटन स्‍थल मैक्‍लोडगंज (धर्मशाला) में स्‍थित निर्वासित तिब्‍बत सरकार की संसद के लिए 45 सांसदों का चयन भी विश्‍व भर में रह रहा तिब्‍बती समुदाय करता है।

 

रविवार को तिब्बत समुदाय ने 45 सदस्यीय निर्वासित संसद के उम्मीदवारों के लिए भी मतदान किया। पहले चरण के चुनाव नतीजे 8 फरवरी को घोषित होंगे। दूसरे और आखिरी चरण की वोटिंग 11 अप्रैल को होगी। इसके नतीजे 14 मई को घोषित होंगे।

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार 22 दिसंबर तक दुनिया भर में निर्वासन में रह रहे तिब्‍बती समुदाय के कुल 79,697 मतदाताओं ने मतदान करने के लिए पंजीकरण किया था। इनमें 55,683 भारत में रहते हैं। तिब्बत की निर्वासित 16वीं संसद में 45 सदस्य हैं। इसमें तिब्बत के तीन पारंपरिक प्रांतों-यू-त्सांग, धोते और धोमी में से 10-10 प्रतिनिधि है। तिब्बती बौद्ध धर्म और प्री-बौद्ध बॉन धर्म के चार स्कूलों में से दो-दो प्रतिनिधि हैं। 

 

तिब्बती भाषा में प्रधानमंत्री यानी मुखिया को सिक्योंग कहते हैं। निर्वासित तिब्बत सरकार में चुनाव आयोग के मुख्य आयुक्त वांगड़ू सेरिंग ने स्‍थानीय मीडिया को बताया कि भारत समेत दुनिया के 26 देशों में करीब 500 मतदान केंद्रों पर तिब्बती मतदाताओं ने वोट डाला। धर्मशाला में 16 मतदान केंद्र थे।

भारत और दुनिया भर में करीब 1.5 लाख निर्वासित तिब्बती हैं। भारत में करीब 1 लाख तिब्बती रहते हैं, जबकि बाकी अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील जैसे देशों में रहते हैं। 

 

उधर, वर्तमान में निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री हार्वर्ड से पढ़े डॉ. लोबसंग सांग्ये हैं। वह दो बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। निर्वासित तिब्बत सरकार के संविधान के मुताबिक कोई भी व्यक्ति लगातार तीसरी बार पीएम पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकता है। लोबसंग सांग्ये के कार्यकाल की ऐतिहासिक उपलब्धि चीन के विरोध के बावजूद अमेरिका की 2020 के तिब्बत नीति और समर्थन अधिनियम का पारित होना है। एक ऐसा निर्णय है, जिसने तिब्बत पर अमेरिकी नीति को मजबूत किया। नए अमेरिकी कानून के मुताबिक अब दलाईलामा को चुनने का फैसला विशेष रूप से वर्तमान दलाईलामा, तिब्बती बौद्ध नेताओं और तिब्बती लोगों के अधिकार क्षेत्र में है।

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