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वाटर सेस पर पंजाब-हरियाणा की आपत्‍ति पर सीएम बोले यह राज्‍य का अधिकार

एफ.आई.आर. लाइव डेस्क Updated on Thursday, March 23, 2023 16:59 PM IST
वाटर सेस पर पंजाब-हरियाणा की आपत्‍ति पर सीएम बोले यह राज्‍य का अधिकार

शिमला,23 मार्च। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए जल उपकर अधिनियम-2023 पर पंजाब व हरियाणा सरकारों की विरोध के चलते यह बात आज हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में भी उठी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में जल उपकर को लेकर वक्तव्य दिया। उन्‍होंने कहा कि यह राज्‍य के अधिकार क्षेत्र का विषय है और पड़ोसी राज्यों के जल अधिकार का उल्लंघन नहीं है।

 

मुख्‍यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपने पड़ोसी राज्यों को सम्मान देते हुए कहना चाहता है कि प्रदेश में सरकार द्वारा वॉटर सेस ऑन हाइड्रो पावर जनरेशन एक्ट 2023 जो लागू किया है वह किसी प्रकार की अन्तर्राजीय संधियों का उल्लंघन नहीं करता न ही इंडस वाटर ट्रिटी के प्रावधानों का उल्लंघन करता है। पंजाब व हरियाणा द्वारा यह कहना कि हिमाचल सरकार का जल उपकर लगाने का फैसला अंतरराज्‍यीय जल विवाद अधिनियम-1956 के खिलाफ है, तर्कसंगत नहीं है क्योंकि इसमें पड़ोसी राज्यों को छोड़े जाने वाले पानी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इस अधिनियम का कोई भी प्रावधान पड़ोसी राज्यों के जल अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है।

 

व्‍यक्‍तव्‍य के अनुसार पावर जनरेशन पर जल उपकर लगाना राज्य के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत है और यह तर्कसंगत है कि राज्य में बीबीएमबी की तीन परियोजनाओं के जलाशयों से प्रदेश की लगभग 45000 हेक्टेयर भूमि जलमग्न गई है। हिमाचल प्रदेश में इन परियोजनाओं से बने जलाशयों से प्रदेश को पानी पर तो कोई भी अधिकार प्राप्त नहीं है अपितु इन जलाशयों के विपरित पर्यावरण प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि स्थापित जल विद्युत परियोजनाओं द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले जल पर उपकर लगाया है न कि पड़ोसी राज्य की सीमाओं में बहने वाले पानी पर।

 

पड़ोसी राज्य में जो वॉटर सेस ऑन हाइड्रो पावर जनरेशन एक्ट 2023 का मामला उठाया जा रहा है वह तर्कसंगत नहीं है क्योंकि यह भी बताना उचित होगा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य नहीं है जिसने परियोजनाओं के उपयोग में आने वाले जल पर उपकर लगाया है। इससे पहले पड़ोसी राज्य उत्तराखंड़ ने 2013 में व जम्मू और कश्मीर ने 2010 में वॉटर सेस एक्ट पारित किया गया है। यह कहना भी उचित होगा कि पहाड़ी राज्यों के पास आय की सीमित साधन होने की स्थिति में राज्य को अपने आय के स्त्रोतों को बढ़ाने का पूरा अधिकार है। इस तर्ज पर अन्य पड़ोसी राज्यों जैसे कि उत्तराखंड व जम्मू और कश्मीर ने पहले ही वॉटर सेस एक्ट लागू कर दिया है। जिनसे राज्य को आय प्राप्त हो रही है अतः यह कहना गलत है कि राज्य को अपने जल स्त्रोतो पर वॉटर सेस लगाने का अधिकर नहीं है।

 

संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, पानी राज्य का विषय है और इसके जल संसाधनों पर राज्य का अधिकार है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश सिंधु जल संधि, 1960 को मान्यता देता है और हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रख्यापित जल विद्युत उत्पादन अधिनियम, 2023 पर हिमाचल प्रदेश जल उपकर उक्त संधि के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करता है। क्योंकि जल उपकर लगाने न तो पड़ोसी राज्यों को पानी छोड़े जान पर कोई प्रभाव पड़ता है और न ही नदियों के प्रवाह पैटर्न में कोई परिवर्तन होता है। इसलिए, यह अध्यादेश पंजाब राज्य के किसी भी तटीय अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता है।

 

इस व्‍यक्‍तव्‍य में कहा गया है कि इसके अलावा, यह प्रस्तुत करना उचित हैं कि जल विद्युत उत्पादन अधिनियम, 2023 पर हिमाचल प्रदेश जल उपकर का कोई भी प्रावधान अंतर्राज्यीय नदी विवाद अधिनियम, 1956 के खिलाफ न है या उल्लंघन करता है और राज्य को बिजली उत्पादन पर जल उपकर लगाने से रोकता नहीं है। पानी के उपयोग पर और इस अधिनियम की धारा 7 के तहत जल उपकर लगाने पर कोई रोक नहीं है। अंतर्राज्यीय नदी विवाद अधिनियम, 1956 की धारा 7 यह प्रावधान करती है।

 

जहां तक भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) का संबंध है, इसकी स्थापना विद्युत मंत्रालय द्वारा पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधानों के अनुसार भाखड़ा नांगल परियोजना के प्रशासन, रखरखाव और संचालन के लिए की गई थी, जो संयुक्त है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और चंडीगढ़ राज्यों का उपक्रम है, इसलिए बीबीएमबी के प्रबंधन पर पंजाब व हरियाण राज्यों का ही नियंत्रण नहीं है। इसलिए, बीबीएमबी की परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए जल उपकर का भार हिमाचल प्रदेश सहित पांच राज्यों में समान रूप से वितरित किया जाएगा।

 

उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर सरकार जैसी विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा जल उपकर पहले ही लगाया जा चुका है। इसी तर्ज पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य का राजस्व बढ़ाने के लिए विभिन्न बिजली उत्पादन एजेंसियों द्वारा पानी के उपयोग पर जल उपकर लगाया है। राज्य को पानी के उपयोग पर उपकर लगाने का पूरा अधिकार है क्योंकि पानी राज्य का विषय है।

 

सुक्खू ने कहा कि मैं माननीय सदन को सूचित करना चाहता हूं कि यह अध्यादेश किसी भी तरह से इंटर स्‍टेट रिवर डिस्‍प्‍यूट एक्‍ट,1956 या अन्य किसी एमओयू के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करता है और मैं समस्त पड़ोसी राज्यों अधिनियम को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह अध्यादेश किसी के भी वैधानिक अधिकार को प्रभावित नहीं करेगा।

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