Saturday, October 17, 2026
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किशाऊ बांध पर मुहर, बिना खर्चे हिमाचल को होगी 1200 करोड़ सालाना आय

एफ.आई.आर. लाइव डेस्क Updated on Tuesday, September 15, 2026 18:21 PM IST
किशाऊ बांध पर मुहर, बिना खर्चे हिमाचल को होगी 1200 करोड़ सालाना आय

शिमला/नई दिल्‍ली, 15 सितंबर। किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए आज नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान राज्यों ने 422 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित टौंस नदी पर 15,624 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इस परियोजना का निर्माण किया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। एमओयू पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने हस्ताक्षर किए।

किशाऊ बांध परियोजना में प्रदेश के हितों की रक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने एक मील पत्थर हासिल किया है। मुख्यमंत्री के सतत और दृढ़ प्रयासों के परिणामस्वरूप परियोजना की वित्तीय लागत वहन करने को लेकर पिछले आठ वर्षों से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करते हुए अब यह परियोजना आकार ले रही है।


मुख्यमंत्री ने मीडिया के प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में 16 जून, 2026 को हुई उच्च स्तरीय बैठक में हिमाचल प्रदेश की ओर से बिजली घटक पर आने वाली लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को परियोजना के जल घटक से लाभान्वित होने वाले दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा राज्यों द्वारा वहन करने पर केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य को इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचाने के लिए इस मामले को मजबूती से केंद्र के समक्ष उठाया था।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने राज्य की ओर से 800 करोड़ रुपये की वित्तीय हिस्सेदारी पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए राज्य के हितों को प्राथमिकता देते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रमुखता से इस पक्ष को उठाया कि परियोजना के जल घटक के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान प्रदान कर रही है और इस स्थिति में बिजली घटक के लिए इस प्रकार की सहायता उपलब्ध न करवाना अनुचित है।

 

उन्होंने कहा कि परियोजना के कारण प्रदेश के संबंधित क्षेत्र की आबादी को विस्थापन का सामना करना पड़ेगा और इस परियोजना से हिमाचल प्रदेश को सर्वाधिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इसलिए प्रदेश पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना अनुचित है और राष्ट्र की प्रगति में हिमाचल के बहुमूल्य योगदान की समुचित भरपाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजना के बिजली घटक में हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष 1,000 मिलियन यूनिट बिजली की हिस्सेदारी मिलेगी। परियोजना के निर्माण के बाद इससे प्रदेश को प्रतिवर्ष 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की संभावना है, जो राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

 

उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने हमेशा प्रदेशवासियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है तथा विभिन्न मंचों पर प्रदेश के हितों को प्रभावी ढंग से उठाया है। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना में राज्य के वैध अधिकार और उचित हिस्सेदारी को सुरक्षित करना प्रदेश के हितों की रक्षा के संघर्ष में एक बड़ी जीत है। इस अवसर पर मुख्य सचिव के. के. पंत तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव आर. डी. नजीम भी उपस्थित थे।

 

प्रतिवर्ष लगभग 1,200 करोड़ रुपये की आय होगीः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में किशाऊ विद्युत परियोजना पर विभिन्न राज्यों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए कहा कि किशाऊ परियोजना से हिमाचल प्रदेश को बड़ा आर्थिक लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते के अनुसार हिमाचल प्रदेश के लिए सबसे बड़ा लाभ है कि हमें किशाऊ बांध से उत्पादित होने वाली 211 मेगावाट बिजली, जिस पर हजारों करोड़ का खर्चा आना था, वह खर्चा अब हिमाचल प्रदेश को वहन नहीं करना पड़ेगा और यह सारा खर्चा जो राज्य पानी का उपयोग करेंगे, वह ही वहन करेंगे। इस परियोजना से संबंधित समझौते को लेकर वर्तमान प्रदेश सरकार ने अपने हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और लंबे समय तक बातचीत के बाद हिमाचल के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय दिया।


श्री सुक्खू ने कहा कि कहा कि आकलन के अनुसार किशाऊ विद्युत परियोजना से 600 करोड़ रुपये की आय होनी थी तथा परियोजना के पूरा होने के बाद वर्तमान अनुमान के अनुसार हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 1,200 करोड़ रुपये की आय होने की संभावना है। इससे प्रदेश की आर्थिकी को मजबूती मिलेगी और इसका लाभ प्रदेश के लोगों तक पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रदेश के जल संसाधनों को हमेशा से बहता हुआ सोना कहा जाता रहा है, लेकिन अब हिमाचल अपने जल संसाधनों से आर्थिक लाभ प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

श्री सुक्खू ने कहा कि किशाऊ परियोजना के लिए पूर्व में हुए समझौते में परियोजना से बनने वाली बिजली की लागत का वहन हिमाचल प्रदेश को करना था। वर्तमान प्रदेश सरकार ने इस शर्त को स्वीकार नहीं किया और तीन वर्षों तक लगातार अपने अधिकारों के लिए बातचीत की। परिणामस्वरूप अब परियोजना से बनने वाली बिजली की लागत उन राज्यों द्वारा वहन की जाएगी, जो इस परियोजना के पानी का उपयोग करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना से प्रभावित होने वाले परिवारों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में प्रभावित होने वाले गांवों की संख्या कम है, जबकि उत्तराखंड में अधिक गांव प्रभावित होंगे। प्रभावित लोगों को भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रावधानों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। श्री सुक्खू ने कहा कि जल आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण एवं मूल्यवान संसाधन बनने जा रहा है। हिमाचल प्रदेश अपने जल अधिकारों को लेकर लगातार मजबूती से अपना पक्ष रख रहा है।

उन्होंने कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ शानन पावर प्रोजेक्ट का मामला भी प्रदेश सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 14,000 मेगावाट जलविद्युत एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम लाभान्वित हो रहे हैं, जबकि प्रदेश को वर्तमान में 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी और एक प्रतिशत लोकल एरिया डेवेल्पमेंट फंड प्राप्त होता है।

श्री सुक्खू ने कहा जब कोई विद्युत परियोजना 12 वर्षों के बाद परियोजना लागत मुक्त हो जाती है, तो 12 से 30 वर्ष की अवधि के दौरान हिमाचल प्रदेश को 30 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी मिलनी चाहिए। इसके बाद 40 वर्ष की अवधि पूरी होने पर परियोजना राज्य सरकार को हस्तांतरित की जानी चाहिए। यदि 40 वर्ष बाद भी कोई संस्था परियोजना का संचालन करना चाहती है, तो हिमाचल को 50 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी मिलनी चाहिए।


उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के जल संसाधनों के दोहन से बड़ी-बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, जबकि प्रदेश को उसके प्राकृतिक संसाधनों के अनुरूप लाभ नहीं मिल रहा है। प्रदेश सरकार अपने जल संसाधनों पर उचित अधिकार और लाभ सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश को प्रतिवर्ष लगभग 90,000 करोड़ रुपये की पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करता है। इनमें स्वच्छ हवा, ग्लेशियरों का संरक्षण और देश की नदियों के लिए जल उपलब्ध करवाना शामिल है। वहीं, आपदाओं के कारण प्रदेश को प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।

श्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक संपदा का लाभ उठाने वाली संस्थाओं और कंपनियों से प्रदेश को उचित आर्थिक लाभ मिलना चाहिए। प्रदेश सरकार इस दिशा में भी अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखे हुए है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। परियोजना में दोनों राज्यों के 50-50 प्रतिशत कर्मचारी होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि परियोजना का कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा।

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