
शिमला/ नई दिल्ली, 27 जनवरी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करके प्रदेश के लिए विभिन्न योजनाओं के लिए बजट की मांग की और अन्य योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भेंट की। बैठक में राज्य में सड़क अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण के संबंध में विस्तृत विचार विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से सड़कों और पुलों की मरम्मत एवं रख-रखाव के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया।
केंद्रीय मंत्री ने सीआरआईएफ के अंतर्गत छैला-नेरीपुल-यशवंत नगर-ओच्छघाट सड़क के लिए सैद्धांतिक रूप से 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की, इससे प्रदेश के सेब उत्पादकों को व्यापक लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने शिमला-मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग की प्रगति से केंद्रीय मंत्री को अवगत करवाया। यह राष्ट्रीय राजमार्ग राज्य की राजधानी को 8 जिलों सहित पड़ोसी राज्यों से जोड़ता है। उन्होंने क्षेत्र की पर्वतीय भौगोलिक स्थिति और भू-वैज्ञानिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए शिमला से शालाघाट तथा भगेड़ से हमीरपुर तक अधिक से अधिक संख्या में सुरंगों के निर्माण का आग्रह किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पैकेज-4 के अन्तर्गत फोरलेन निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया, जिसमें चीलबाहल स्थित हमीरपुर बाईपास के छोर से भंगबार तक का हिस्सा तथा नया उत्तरी हमीरपुर बाईपास शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गत मानसून के कारण चीलबाहल से पक्का भरोह खंड में विभिन्न स्थानों पर भारी क्षति पहुंची है और पिछले पांच से छह वर्षों में इस सड़क के सुदृढ़ीकरण का कार्य नहीं किया गया। यह सड़क विभिन्न धार्मिक स्थलों तक पहंुचने में महवत्पूर्ण है। उन्होंने एनएच-03 के चिलबाहल से पक्का भरोह खंड को विकास एवं रखरखाव कार्यों के लिए हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (एनएच विंग) को सौंपने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि एनएचएआई द्वारा 38.37 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान करने की भी अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री ने इस राशि को मंजूरी प्रदान करते हुए राज्य सरकार को पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से भेंट करके राज्य के वास्तविक ट्री कवर 29.5 प्रतिशत और आधिकारिक रूप से दर्ज 27.99 प्रतिशत के बीच पाई गई विसंगति के बारे में अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि यह विसंगति राज्य के वन एवं ट्री कवर की समेकित गणना में वनों के बाहर के पेड़ों (ट्रीज आउटसाइट फोरेस्ट) को शामिल न किए जाने के कारण उत्पन्न हुई है। राज्य सरकार निजी भूमि पर विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत वृक्षों के कटान पर कड़े नियम लागू किए हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार से इस संबंध में राज्य को प्रोत्साहन नहीं मिलता है।
मुख्यमंत्री ने इस 1.5 प्रतिशत घटक को हरित आवरण में शामिल किए जाने पर बल देते हुए कहा कि इससे राज्य के वास्तविक पारिस्थितिक एवं वानिकी योगदान को उचित मान्यता मिलेगी। उन्होंने कहा कि ट्रीज आउटसाइट फोरेस्ट, हरित आवरण के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी को क्षरण से बचाने में सहायक हैं।
उन्होंने आग्रह किया कि वित्त आयोग अथवा केंद्र सरकार द्वारा की जाने वाली अन्य सभी आवंटन गणनाओं में हिमाचल प्रदेश के लिए 29.5 प्रतिशत वन एवं ट्री कवर को मान्यता दी जाए। उन्होंने अनुरोध किया कि 1.5 प्रतिशत ट्रीज आउटसाइट फोरेस्ट वनों को पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण एवं संवर्धन और पर्यावरणीय शासन में एक वैध एवं नीतिगत रूप से महत्त्वपूर्ण योगदान के रूप में स्वीकार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रीज आउटसाइट फोरेस्ट घटक का कम आकलन करने से राष्ट्रीय पारिस्थितिकी सेवाओं में हिमाचल प्रदेश के वास्तविक योगदान को कमतर आंका जाता है। इससे उन राज्यों के साथ पक्षपात की स्थिति उत्पन्न होती है जो वनों के संरक्षण को प्राथमिकता प्रदान कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने गैर-वन और निजी भूमि पर वन एवं हरित आवरण बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की भी जानकारी दी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने राज्य को हर संभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

इसके अलावा मुख्यमंत्री आज केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु से भी मिले। उन्होंने कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए केंद्रीय मंत्री से सहयोग और इस परियोजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (अनुदान) प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने भूमि से जुड़े विभिन्न मामलों के शीघ्र निपटारे का अनुरोध करते हुए कहा कि कांगड़ा जिला में पर्यटन की दृष्टि से अपार संभावनाएं विद्यमान हैं और राज्य सरकार पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कई महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं को क्रियान्वित कर रही है।
उन्होंने कम दृष्यता की स्थिति में भी उड़ानों के संचालन को सुनिश्चित करने के लिए विशेष विजुअल फ्लाइट रूल्स लागू करने का आग्रह किया, ताकि न्यूनतम दृष्यता मापदंड को वर्तमान 5 किलोमीटर से 2.5 किलोमीटर किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कम उड़ान संचालन और यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए कुल्लू और शिमला हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था को सीआईएसएफ के स्थान पर राज्य पुलिस को सौंपने पर भी चर्चा की, इससे राज्य का वित्तीय बोझ कम किया जा सकेगा। उन्होंने शिमला हवाई अड्डे पर उड़ान संचालन का समय बढ़ाकर दोपहर 4 बजे तक करने का भी अनुरोध किया, ताकि उड़ानों की संख्या में वृद्धि हो सके।
उन्होंने चंडीगढ़-शिमला और शिमला-चंडीगढ़ के बीच उड़ानों की आवृति बढ़ाने तथा प्रस्तावित चार हेलीपोर्ट् को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का भी आग्रह किया।
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने अधिकारियों को कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए संबंधित विभागों के साथ संयुक्त बैठक कर डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए और राज्य को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह भी उपस्थित थे।







