
चंडीगढ़, 11 दिसंबर। किसानों और केंद्र सरकार के बीच कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध के बीच हरियाणा के भाजपा सरकार पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। किसानों की पार्टी मानी जाने वाली 10 विधायकों वाली जेजेपी इस मुद्दे पर कभी भी खट्टर सरकार से समर्थन वापसी ले सकती है। इससे पहले भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी और पंजाब की शिरोमणि अकाली दल-बादल ने किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।
एक नेशनल न्यूज पेपर के अनुसार किसानों के मुद्दे को लेकर हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर सरकार को समर्थन दे रही जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण उपमुख्यमंत्री और जेजेपी नेता दुष्यंत चैटाला के स्वर्गीय दादा देवीलाल की किसान नेता के रूप में एक बहुत बड़ी छवि हरियाणा निवासियों के दिल में है। जिसके चलते दुष्यंत पर लगातार जन दबाव बढ़ रहा है। इसको लेकर 8 दिसंबर को एक एयरपोर्ट पर दुष्यंत चैटाला की अपने पार्टी विधायकों के साथ बैठक हुई। जिसमें सरकार से समर्थन वापसी को लेकर भी चर्चा हुई।
न्यूज पेपर के अनुसार बैठक में किसान आंदोलन को लेकर चर्चा हुई। जिसमें विधायकों से किसान आंदोलन का उनके क्षेत्र में असर, राज्यों को लोगों के रुख आदि के बारे में फीडबैक लिया गया।
न्यूज पेपर के अनुसार जेजेपी विधायक देवेंदर बबली ने इशारों-इशारों में जरूरत पड़ने पर भाजपा की खट्टर सरकार से समर्थन लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि जेजेपी की पहली प्राथमिकता ही किसान है। प्रदेश के मतदाताओं ने ही हमें यहां भेजा है। यदि केंद्र और उनके बीच कोई बात नहीं बनती और कल को उनका शोषण होता है तो हमारी पार्टी आंख बंद करके नहीं बैठ सकती।
बबली के अनुसार बैठक का उद्देश्य वर्तमान में किसानों आंदोलन के मद्देनजर जारी परिस्थितियों पर चर्चा थी। जेजेपी मुख्य रूप से किसानों और मजदूरों की पार्टी है और उसका मुख्य वोट बैंक भी यही हैं। बबली ने दुष्यंत चैटाला समेत सभी विधायकों पर किसान आंदोलन के मुद्दे पर जन दबाव के चलते भाजपा सरकार से समर्थन वापसी का इशारा किया। उन्होंने कहा कि इसका जल्द से जल्द समाधान होना चाहिए। बबली के अनुसार दुष्यंत चैटाला इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के नेताओं के संपर्क में हैं। इस मामले के जल्द समाधान के लिए भाजपा पर दबाव बनाया जा रहा है। वहीं, बरवाला से जेजेपी के विधायक जोगी राम सिहाग ने ऐसी किसी बैठक के बारे में जानकारी होने से इनकार किया है।
गौरतलब है कि हरियाणा में 90 सदस्यों वाली विधानसभा में खट्टर सरकार जेजेपी के 10 विधायकों के समर्थन में चल रही है।