
चंडीगढ़, 31 दिसंबर। कृषि कानून के खिलाफ किसानों के आंदोलन ने हरियाणा निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा को करारा झटका दिया है। हरियाणा निकाय चुनाव में 27 दिसंबर को हुए मतदान में भाजपा के हाथ केवल एक सीट लगी है। वहीं, सत्ता में उसकी सहयोगी जननायक जनता पार्टी का तो खाता भी नहीं खुला। जबकि एक पर कांग्रेस और दूसरी हरियाणा जनचेतना पार्टी ने जीत हासिल की है।
तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन का मुख्य कंेद्र पंजाब और हरियाणा बनकर उभरा है। हरियाणा में तो किसान सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं का बहिष्कार कर रहे हैं। यहां तक कि उनके नेताओं को कई बार कार्यक्रम में शामिल होने की जगह बैरंग वापस लौटना पड़ रहा है।
हरियाण के सबसे बड़े किसान नेता देवीलाल के पड़पोते और जननायक जनता पार्टी प्रमुख दुष्यंत चैटाला भी इस गुस्से का शिकार हुए हैं। दुष्यंत ने किसानों के मुद्दे को लेकर दिल्ली तक का दौरा किया। परंतु प्रदेश के किसान उनसे इस मामले में कोई ठोस कदम उठाने की उम्मीद कर रहे थे। वे चाह रहे थे कि दुष्यंत सत्ता को छोड़ उनका साथ दे। मालूम हो कि हरियाणा में भाजपा सरकार जेजेपी की बैसाखी पर टिकी हुई है।
हरियाणा के तीन नगर निगम, तीन नगर पालिका और एक नगर परिषद के लिए 27 दिसंबर को मतदान हुआ था। जिसमें से भाजपा-जेजेपी गठबंधन को केवल दो जगह पंचकूला नगर निगम और रेवाड़ी नगर परिषद में ही जीत हासिल हुई। बाकी पांच जगहों पर उसे हार का सामना करना पड़ा। भाजपा पंचकूला नगर निगम मेयर और रेवाड़ी नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव ही जीत पाई। वहीं, सोनीपत नगर निगम मेयर में कांग्रेस जीती। अंबाला नगर निगम मेयर में हरियाणा जनचेतना पार्टी जीती। उधर, सांपला नगरपालिका चेयरमैन पर कांग्रेस समर्थित, धारूहेड़ा नगरपालिका चेयरमैन पर निर्दलीय और उकलाना नगरपालिका चेयरमैन पर निर्दलीय उम्मीदवार जीता।