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मिशन मोड में मिल रहा भारत की पर्यटन क्षमताओं को बढ़ावा

एफ.आई.आर. लाइव डेस्क Updated on Thursday, March 30, 2023 15:30 PM IST
मिशन मोड में मिल रहा भारत की पर्यटन क्षमताओं को बढ़ावा

-पुनीत चटवाल                   

पूरी दुनिया में सबसे तेजी से उभरते पर्यटन गंतव्‍यों में से एक, भारत का यात्रा और पर्यटन क्षेत्र, भरोसेमंद विकास की रूपरेखा प्रदान करता है; एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद, अब यह क्षेत्र बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए तैयार है। पर्यटन क्षेत्र को एक मिशन के तौर पर विकसित करने के लिए, भारत के बजट 2023 में विभिन्न पहलों और योजनाओं की रूपरेखा पेश की गई है।

 

बजट-उपरांत सत्र में, माननीय प्रधानमंत्री ने भारत के विकास को गति देने में पर्यटन क्षेत्र के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र जीडीपी और रोजगार सृजन दोनों में योगदान दे सकता है। प्रधानमंत्री का यह कथन, पर्यटन क्षेत्र में मौजूद अपार संभावनाओं का प्रमाण है। उद्योग जगत के हितधारकों और सरकार के बीच सामूहिक कार्रवाई पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है, ताकि इस क्षेत्र के लिए अब तक के सबसे उज्ज्वल भविष्य का निर्माण किया जा सके और यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था तथा पूरे समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने में सक्षम हो सके।         

 

सहयोग की शक्ति

 

केंद्र सरकार द्वारा पर्यटन को प्रोत्साहन देने का मूल आधार इस तथ्य की स्वीकृति है कि यात्रा और पर्यटन क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए समर्थन प्रदान किए जाने की आवश्यकता है। केंद्रीय बजट ने सहयोग के लिए छह विषयों को रेखांकित किया है, जिनमें से दो विषय हैं – आपसी तालमेल और सार्वजनिक-निजी-भागीदारी।

 

पर्यटन को विकसित करने और बढ़ावा देने के लिए सरकार, निजी क्षेत्र और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग के महत्व पर बहुत अधिक जोर दिया गया है। विकास का एक प्रमुख कारक होने के अलावा; यह आपसी सहयोग, रचनात्मकता को प्रोत्साहन देता है, प्रतिस्पर्धा बढ़ाता है और दूरदर्शी परिणाम प्राप्त करता है। यदि संबंधित पक्ष अलग-अलग काम करते हों, तो इन परिणामों को हासिल करना एक कठिन कार्य हो सकता है। उदाहरण के लिए, काशी विश्वनाथ धाम मंदिर में आगंतुकों की संख्या, पिछले साल के औसत 80 लाख से बढ़कर 7 करोड़ हो गई है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास नव विकसित स्थल को, अंतिम रूप दिए जाने के बाद, एक वर्ष की अवधि में 27 लाख लोगों ने देखा।

 

पर्यटन, बदलाव के दौर में

 

पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए जिन छह विषयों को रेखांकित किया गया है, उनमें पहला है – पर्यटन स्थल केंद्रित दृष्टिकोण। यह भविष्य के पर्यटन केंद्रों के रूप में 50 पर्यटन-स्थलों को प्रोत्साहन देने के लिए शासन के विभिन्न प्रभागों को एक साथ लाने की बात करता है। प्रधानमंत्री ने काशी, केदारनाथ, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और पावागढ़ जैसे स्थानों का उदाहरण दिया, यह बताने के लिए कि कैसे एकीकृत दृष्टिकोण के साथ सरकार के विभिन्न विभागों के एक साथ आने से इन स्थानों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हो सकती है।

 

हमने देखा है कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान और ‘देखो अपना देश’ की पहल ने घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दिया, जिससे आतिथ्य-सत्कार क्षेत्र की कंपनियों को सभी क्षेत्रों में आपूर्ति बढ़ाने का अवसर मिला– व्यवसाय, विलासितापूर्ण संपत्तियों, होम स्टे, विला आदि से लेकर बजट होटलों तक। इन 50 पर्यटन-स्थलों के विकास से आने वाले वर्षों में न केवल स्थितियां बेहतर होंगी, बल्कि भारत में पर्यटन क्रांति की भी शुरुआत होगी।

 

पर्यटन एक सामाजिक-आर्थिक गतिविधि है और विकास के लिए एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण है, जो सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों के साथ पर्यावरण आधारित उचित प्रबंधन को संतुलित करता है। इस वर्ष के बजट के प्रमुख विषयों में शामिल हैं- स्थानीय संस्कृति का लाभ उठाना, विरासत को संरक्षित करना, कल्याण और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना तथा सभी प्रकार के नीति निर्माण में सतत विकास को ध्यान में रखते हुए जमीनी स्तर पर जीवन स्तर में सुधार करना।     

 

प्रौद्योगिकी का लाभ

 

पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने वाले विषयों की सूची में एक महत्वपूर्ण विषय है- इस क्षेत्र में चल रही डिजिटलीकरण और नवाचार की प्रक्रिया। डिजिटल तकनीक, ए.आर./वी.आर. और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस); यात्रा और पर्यटन उद्योग में क्रांति लाने के लिए तैयार हैं। यात्रा-अनुभव, पहले से कहीं अधिक व्यक्ति-केन्द्रित, बहु-आयामी और आपसी संवाद आधारित होते जा रहे हैं। ए.आर. और वी.आर.यात्रियों को उनकी यात्रा से पहले ही गंतव्य-स्थलों के बारे में जानकारी प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं, प्रसिद्ध स्थानों, ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक अनुभवों के वर्चुअल पर्यटन की सुविधा दे सकते हैं और पर्यटन स्‍थल के चुनाव के बारे में सहायता कर सकते हैं। ए.आई.-संचालित चैटबॉट और डिजिटल सहायक, यात्रियों को उनकी यात्रा-योजना बनाने में मदद कर सकते हैं, व्यक्तिगत गतिविधियों की सिफारिश कर सकते हैं और यात्रा के दौरान वास्तविक समय पर सहायता प्रदान कर सकते हैं। उभरती हुई तकनीकें भी, इस क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन, इसके स्थायित्व और अति-पर्यटन के खतरों की निगरानी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

 

प्रौद्योगिकी को अपनाने से समन्वित दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलता है, जो कम खर्च करने वाले विदेशी पर्यटकों से जुड़ी समस्या का समाधान करने में देश की मदद कर सकता है। औसत आधार पर, हम पाते हैं कि विदेशी पर्यटक, संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में भारत में 33 प्रतिशत कम खर्च करते हैं और ऑस्ट्रेलिया की तुलना में यह कमी 60 प्रतिशत से भी अधिक है। 

 

समय की मांग

 

‘कारोबार में आसानी’ दृष्टिकोण को अब यात्रा, पर्यटन और आतिथ्य-सत्कार क्षेत्र में भी शुरू करने की आवश्यकता है। भारत की अपार पर्यटन क्षमता के उपयोग के लिए एक व्यापक रणनीति की आवश्यकता है, जो योजना, स्थान, लोग, नीति, प्रक्रिया और प्रचार के छह प्रमुख स्तंभों को शामिल करे। यह रेखांकित करना महत्वपूर्ण है कि बजट-उपरांत सत्र में इन घटकों पर प्रभावी तरीके से विचार-विमर्श किया गया, जिनमें शामिल हैं- गंतव्य योजना और प्रबंधन, अवसंरचना विकास, स्थायित्व और सुरक्षा, मानव पूंजी का विकास तथा केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय के लिए नीति व प्रक्रिया आधारित कार्यक्रमों के साथ-साथ भारतीय पर्यटन के नैरेटिव को बढ़ावा देना।

    

संवैधानिक रूप से, पर्यटन एक राज्य-सूची का विषय है और केंद्रीय पर्यटन विभाग इसे समवर्ती-सूची में स्थानांतरित करने के लिए जोर दे रहा है, ताकि केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर नीति निर्माण की अनुमति मिल सके। उदाहरण के लिए, कुछ भारतीय राज्यों ने पहले ही पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान कर दिया है, जो दशकों से इस क्षेत्र की प्रमुख मांग रही है।

 

पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने से इस क्षेत्र के विकास को और गति मिलेगी। राष्ट्रीय पर्यटन बोर्ड का गठन, सरकार के पास विचाराधीन है। सही नीतियों और पहलों के साथ, यह भारत को विश्व स्तर पर शीर्ष-3 यात्रा और पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने के लिए एक आदर्श लॉन्च पैड सिद्ध होगा।  

 

(लेखक, होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एचएआई) के अध्यक्ष और पर्यटन तथा आतिथ्य पर सीआईआई की राष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)                 

 

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