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हिमाचल के मंदिरों और धरोहरों के संरक्षण पर खर्चे जाएंगे 550 करोड़ रुपये

एफ.आई.आर. लाइव डेस्क Updated on Tuesday, July 22, 2025 16:59 PM IST
हिमाचल के मंदिरों और धरोहरों के संरक्षण पर खर्चे जाएंगे 550 करोड़ रुपये

शिमला, 22 जुलाई। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक धरोहरों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण व विकास के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भाषा, कला और संस्कृति विभाग का जिम्मा सम्भाल रहे उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर प्रदेश सरकार द्वारा लगभग 550 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं।

प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सरकार द्वारा लगभग 50 करोड़ रुपये की राशि प्राचीन मंदिरों, किलों और पुरातात्विक महत्त्व के स्थलों के जीर्णोद्धार के लिए स्वीकृत की गई है। इसमें से राज्य के अधिगृहीत मंदिरों में विभिन्न विकासात्मक कार्यों के लिए 37 करोड़ रुपये का सहायतानुदान प्रदान किया गया है।

 

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर में 8 अगस्त, 2023 से सुगम दर्शन प्रणाली शुरू की गई है, जिससे प्रभावी भीड़ प्रबंधन सहित वृद्धजनों और दिव्यांगों को विशेष सुविधा प्राप्त हो रही है। इसके साथ ही ऑनलाइन लंगर बुकिंग और ऑनलाइन दर्शन जैसी डिजिटल सेवाएं भी श्रद्धालुओं को उपलब्ध करवाई गई हैं। ऐसी व्यवस्थाएं प्रदेश के अन्य मंदिर न्यासों में भी लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। प्रसाद योजना के तहत माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर के लिए 56.26 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक विरासत को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश सरकार द्वारा 250 करोड़ रुपये से मातारानी के भव्य भवन का निर्माण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश सरकार ने माता श्री ज्वालाजी और माता श्री नैना देवी मंदिरों के लिए भी 100-100 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।

 

पूजा विधि एवं मंत्रोच्चारण में शुद्धता लाने के लिए 5 से 25 फरवरी 2025 तक श्री चिंतपूर्णी मंदिर के 15 तथा माता श्री नैना देवी मंदिर के 10 पुजारियों को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत संकाय में ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। भविष्य में अन्य मंदिर न्यासों के पुजारियों को भी चरणबद्ध तरीके से यह प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, प्रदेश सरकार द्वारा सांस्कृतिक धरोहरों के अनुरक्षण के लिए 11.16 करोड़ रुपये तथा आवर्ती निधि योजना के अंतर्गत धार्मिक संस्थानों को वार्षिक पूजा-अर्चना और परिसंपत्तियों के विकास हेतु 1 करोड़ रुपये का सहायतानुदान भी स्वीकृत किया गया है। वहीं, प्रदेश के छोटे मंदिरों को मिलने वाली धूप-बत्ती सहायता राशि को वित्त वर्ष 2025-26 में दोगुना कर दिया गया है।

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण व संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। हम आस्था के केंद्रों को केवल संरचनात्मक दृष्टि से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और परंपरा के रूप में संरक्षित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें, पारंपरिक पूजा पद्धति में गुणवत्ता लाई जाए और मंदिरों को डिजिटल व व्यवस्थित बनाया जाए।

 

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देशभर में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित व प्रसारित किया जाए। इसके लिए सांस्कृतिक उत्सवों, डिजिटल प्लेटफार्मों, दस्तावेजीकरण और प्रदर्शनियों के माध्यम से हिमाचल की लोक कलाओं, पारंपरिक संगीत, शिल्प और रीति-रिवाजों को साझा किया जाएगा। इससे न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नया आयाम मिलेगा, बल्कि युवाओं में अपनी परंपराओं के प्रति गर्व और जुड़ाव की भावना भी प्रबल होगी तथा यह साझा सांस्कृतिक संवाद देश की एकता और विविधता में अद्वितीय योगदान देगा। प्रदेश सरकार की यह पहल हिमाचल की सांस्कृतिक विविधता को सहेजने में मीलपत्थर साबित होगी।

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