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अगर आपकों हैं ये बीमारियां तो जानलेवा हो सकता है कारोना

एफ.आई.आर. लाइव डेस्क Updated on Saturday, November 28, 2020 09:56 AM IST
अगर आपकों हैं ये बीमारियां तो जानलेवा हो सकता है कारोना

नई दिल्ली (28 नवंबर) : कोलेस्ट्राल कोरोना के मरीजों के लिए घातक साबित हो रहा है। चीनी के वैज्ञानिकों की रिसर्च में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दिल और शूगर के मरीजों को कोरोना का खतरा ज्यादा है। इसकी मुख्य वजह बढ़ता कोलेस्ट्राल बताई गई है। चीन के वैज्ञानिकों के मुताबिक कोरोना के मामले में अक्सर मरीज में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है। यह कोरोनावायरस को संक्रमण फैलाने में मदद करता है। ऐसे मरीज जो मोटापे से परेशान हैं, उनमें भी संक्रमण के बाद मौत का खतरा ज्यादा है

संक्रमण के बाद वायरस कोलेस्ट्रॉल के कणों के साथ मिलकर खास तरह का रिसेप्टर एसआर-बी1 (SR-B1) तैयार करता है। ऐसा होने पर संक्रमण का स्तर और जान का खतरा दोनों बढ़ते हैं। यानि कोलेस्ट्रॉल जितना ज्यादा होगा जान का जोखिम भी उतना ही बढ़ेगा।

 

कोलेस्ट्रॉल कैसे मददगार है कोरोना का

रिसर्च करने वाले चाइनीज एकेडमी ऑफ मिलिट्री साइंस के वैज्ञानिकों का कहना है, कोलेस्ट्रॉल इंसान के शरीर की हर कोशिकाओं में पाया जाता है इसकी मदद से एसआर-बी1 (SR-B1) रिसेप्टर शरीर पर धावा बोलता है। संक्रमण फैलाने वाले कोरोना के स्पाइक प्रोटीन के दो हिस्से होते हैं- सबयूनिट-1 और सबयूनिट-2। कोलेस्ट्रॉल सबयूनिट-1 के साथ जुड़ता है और संक्रमण को गंभीर बनाता है।

 

दिल और शूगर के मरीजों को ज्यादा खतरा क्यों


वैज्ञानिकों का कहना है, हार्ट और डायबिटीज के मरीजों में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ जाता है जो हालत को नाजुक बनाने के साथ मौत का खतरा बढ़ाता है। आंकड़े बताते हैं कि कोरोना के लगभग 50 फीसदी मरीज दिल की बीमारी, शूगर और दिमाग से जुड़ी बीमारी से जूझ रहे थे। ऐसे मरीज जो मोटापे से परेशान हैं, उनमें भी संक्रमण के बाद मौत का खतरा ज्यादा है।

नेशनल हेल्थ सर्विसेज के आंकड़े भी बताते हैं, कोरोना के 29 फीसदी मरीज हृदय रोगी और 19 फीसदी डायबिटीज से परेशान थे। इम्पीरियल कॉलेज लंदन की स्टडी में भी यह सामने आया है कि टाइप-2 डायबिटीज ये जूझने वाले कोरोना के मरीजों में मौत का खतरा टाइप-1 डायबिटीज के मुकाबले दोगुना है।

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