Thursday, December 01, 2022
BREAKING
घास काट रहा व्‍यक्‍ति पांव फिसलने से खाई में गिरा, मौत दुर्घटनाओं में दो बाइक सवार युवकों की जान गई सड़क किनारे खड़े बुजुर्ग को बैक हो रहे टिप्‍पर ने मारी टक्‍कर, मौत सड़क किनारे पड़ा मिला युवक का शव, पुलिस जांच में जुटी कारोबारी की डंडों से पीट-पीट कर हत्‍या की, दो गिरफ्तार मोटर साइकिल पर लिफ्ट देकर महिला को ले गया जंगल और किया दुष्‍कर्म चुवाड़ी में 1 दिसंबर को होगा पूर्व सैनिक व उनके परिवारों का स्वास्थ्य जांच शिविर वन खेल-कूद प्रतियोगिता: 100 मीटर दौड़ में मनीष ने मारी बाजी कार खाई में गिरते ही बनी आग का गोला, फौजी और एक बच्‍चा थे सवार तरसूह हत्‍याकांड: प्रेम प्रसंग के चलते दुश्‍मनी में बदली दोस्‍ती और फिर हुआ खून
 

काबुलः भारत की बोलती बंद क्यों है?

एफ.आई.आर. लाइव डेस्क Updated on Wednesday, August 18, 2021 17:46 PM IST
काबुलः भारत की बोलती बंद क्यों है?

पिछले दो हफ्तों से मैं बराबर लिख रहा हूं और टीवी चैनलों पर बोल रहा हूं कि काबुल पर तालिबान का कब्जा होने ही वाला है लेकिन मुझे आश्चर्य है कि हमारा प्रधानमंत्री कार्यालय, हमारा विदेश मंत्रालय और हमारा गुप्तचर विभाग आज तक सोता हुआ क्यों पाया गया है ? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से बहुत लंबा-चौड़ा भाषण दे डाला और 15 अगस्त को जिस समय उनका भाषण चल रहा था, तालिबान काबुल के राजमहल (काखे-गुलिस्तां) पर कब्जा कर रहे थे लेकिन ऐसा नहीं लगा कि भारत को ज़रा-सी भी उसकी चिंता है। अफगानिस्तान में कोई भी उथल-पुथल होती है तो उसका सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान और भारत पर होता है लेकिन ऐसा लग रहा था कि भारत खर्राटे खींच रहा है जबकि पाकिस्तान अपनी गोटियाँ बड़ी उस्तादी के साथ खेल रहा है। एक तरफ वह खून-खराबे का विरोध कर रहा है और पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और अशरफ गनी के समर्थक नेताओं का इस्लामाबाद में स्वागत कर रहा है और दूसरी तरफ वह तालिबान की तन, मन, धन से मदद में जुटा हुआ है बल्कि ताजा खबर यह है कि अब वह काबुल में एक कमाचलाऊ संयुक्त सरकार बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन भारत की बोलती बिल्कुल बंद है। वह तो अपने डेढ़ हजार नागरिकों को भारत भी नहीं ला सका है।

 

वह सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है लेकिन वहाँ भी उसके नेतृत्व में सारे सदस्य जबानी जमा-खर्च करते रहे। मेरा सुझाव था कि अपनी अध्यक्षता के पहले दिन ही भारत को अफगानिस्तान में संयुक्तराष्ट्र की एक शांति-सेना भेजने का प्रस्ताव पास करवाना था। यह काम वह अभी भी करवा सकता है। कितने आश्चर्य की बात है कि जिन मुजाहिदीन और तालिबान ने रूस और अमेरिका के हजारों फौजियों को मार गिराया और उनके अरबों-खरबों रुपयों पर पानी फेर दिया, वे तालिबान से सीधी बात कर रहे हैं लेकिन हमारी सरकार की अपंगता और अकर्मण्यता आश्चर्यजनक है। मोदी को पता होना चाहिए कि 1999 में हमारे अपहृत जहाज को कंधार से छुड़वाने में तालिबान नेता मुल्ला उमर ने हमारी सीधी मदद की थी। प्रधानमंत्री अटलजी के कहने पर पीर गैलानी से मैं लंदन में मिला, वाशिंगटन स्थित तालिबान राजदूत अब्दुल हकीम मुजाहिद और कंधार में मुल्ला उमर से मैंने सीधा संपर्क किया और हमारा जहाज तालिबान ने छोड़ दिया। तालिबान पाकिस्तान के प्रगाढ़ ऋणी हैं लेकिन वे भारत के दुश्मन नहीं हैं। उन्होंने अफगानिस्तान में भारत के निर्माण-कार्य का आभार माना है और कश्मीर को भारत का आतंरिक मामला बताया है। हामिद करजई और डाॅ. अब्दुल्ला हमारे मित्र हैं। यदि वे तालिबान से सीधी बात कर रहे हैं तो हमें किसने रोका हुआ है? अमेरिका ने अपनी शतरंज खूब चतुराई से बिछा रखी है लेकिन हमारे पास दोनों नहीं है। न शतरंज, न चतुराई!

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

(लेखक, पाक—अफगान मामलों के विशेषज्ञ हैं)

आखिर मुख्यमंत्री बीच में ही क्यों बदले जाते हैं?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक की कलम से : आखिर मुख्यमंत्री बीच में ही क्यों बदले जाते हैं?

ऐसी आजादी का अर्थ क्या है? जो 40 दलित परिवारों को अपना गांव छोड़कर भागना पड़ा

डॉ. वेदप्रताप वैदिक की कलम से : ऐसी आजादी का अर्थ क्या है? जो 40 दलित परिवारों को अपना गांव छोड़कर भागना पड़ा

कोरोना प्रोटोकॉल बनाम आम जनता, राजनीतिक गतिविधियां कोविड फ्री

संपादकीय : कोरोना प्रोटोकॉल बनाम आम जनता, राजनीतिक गतिविधियां कोविड फ्री

मोदी के सपने अच्छे लेकिन....?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक की कलम से : मोदी के सपने अच्छे लेकिन....?

एक पहलवानः कई लकवाग्रस्त मरीज़

डॉ. वेदप्रताप वैदिक की कलम से : एक पहलवानः कई लकवाग्रस्त मरीज़

मेरी जाति हिंदुस्तानी की जीत..राज्यों को मिला ओबीसी की जन-गणना करवाने का अधिकार

डॉ. वेदप्रताप वैदिक की कलम से : मेरी जाति हिंदुस्तानी की जीत..राज्यों को मिला ओबीसी की जन-गणना करवाने का अधिकार

शादियों में मजहब का अड़ंगा?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक की कलम से : शादियों में मजहब का अड़ंगा?

स्वभाषाओं का स्वागत लेकिन....?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक की कलम से : स्वभाषाओं का स्वागत लेकिन....?

VIDEO POST

View All Videos
X