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बद्रीसिंह भाटिया का कारोना संक्रमण से निधन, साहित्‍य जगत गमगीन

एफ.आई.आर. लाइव डेस्क Updated on Saturday, April 24, 2021 19:53 PM IST
बद्रीसिंह भाटिया का कारोना संक्रमण से निधन, साहित्‍य जगत गमगीन

मंडी/शिमला, 24 अप्रैल। हिमाचल के वरिष्ठ कथाकार एवं साहित्यकार बद्री सिंह भाटिया का कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया। उनका इस तरह अचानक चले जाना हिमाचल के हिंदी साहित्य के लिए अपूर्णिय क्षति माना जा रहा है। बद्री सिंह भाटिया का जन्म 4 जुलाई 1947 को प्रदेश के सोलन जिला के अर्की में हुआ था। उनके निधन पर साहित्यिक जगत में सन्नाटा सा पसर गया है। उन्हें कई साहित्यकारों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से श्रद्धासुमन अर्पित किए जा रहे हैं। बद्री सिंह भाटिया दिल्ली में उपचार के सिलसिले में गए थे। जहां 24 अप्रैल सुबह पांच बजे अंतिम सांस ली, उनका इस तरह से जाना हिमाचल के साहित्य जगत के लिए ऐसी क्षति दे गया है जो शायद ही कभी पूरी हो।

 

 

सुकेत साहित्य एवं सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष डा. गंगा राम राजी ने बताया कि अभी दो दिन पहले ही उनका संदेश आया कि मैं मोबाइल बंद कर रहा हूं और उपचार के लिए अस्पताल जा रहा हूं। यह पोस्ट मैंने सभी मित्रों की जानकारी के लिए फेसबुक पर डाली, परंतु किसे मालूम था कि वे मोबाइल को इस तरह से बंद कर गए हैं कि कभी भी ऑन नहीं कर पाएंगे। बद्री सिंह भाटिया प्रदेश के मशहूर साहित्यकार ही नहीं बल्कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की पत्रिका हिमप्रस्थ और साप्ताहिक गिरिराज के संपादन से वर्षों जुड़े रहे। हिम प्रस्थ में रहते हुए उन्होंने हिमाचल के साहित्यकारों को विशेष रूप से स्थान दिया वहीं पर हिमाचल की हिंदी कहानी पर भी विशेषांक निकाला था।

 

 

वहीं शिमला मेडिकल कालेज के कर्मचारी यूनियन की पत्रिका तरू-प्रछाया का संपादन भी सफलता पूर्वक किया। इसके अलावा ठिठके हुए पल, मुश्तरका जमीन, छोटा पड़ता आसमान,आदि कहानी संग्रह के साथ उपन्यास पहाड़ और कंटीली तारों का घेरा कविता संग्रह के रचयिता का मुस्कुराता चेहरा अब देखने को नहीं मिलेगा। लेखन के लिए बहुत से साहित्यिक सम्मान उन्हें मिले हैं। अभी हाल ही में हिमाचल कला, भाषा अकादमी शिमला ने उनके उपन्यास डेंजर जोन पर उन्हें अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। परंतु करोना के कारण उन्हें यह सम्मान जीते जी प्राप्त नहीं हुआ।

 

 

साहित्यकार होने के साथ वे एक बहुत अच्छे इनसान भी थे। वे हमेशा दूसरों को प्रोत्साहित करते रहते थे। डा. गंगाराम राजी के अनुसार उन्होंने मेरे बहुत से उपन्यासों की समीक्षा भी की है और मुझे हमेशा लिखने के लिए प्रेरित करते थे। हिमाचल का जन जीवन विशेषकर सोलन के अर्की जिला की सांस्कृतिक व आंचलिक धरोहर को जानने के लिए उनके साहित्य से गुजरना होगा। ऐसे विद्वान साथी को खो कर मैं और हमारे सुकेत परिषद के सदस्य बहुत दुखी हैं और सब साथी उन्हें भाव भीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। भगवान उनकी आत्मा शांति दे और उनके परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।

 

 

वहीं पर युवा साहित्यकार पवन चौहान ने कहा कि बेहद दुखद, बद्री सिंह भाटिया सर नहीं रहे... वे बीमारियों से जूझते रहे... लेकिन कभी जिंदगी के प्रति अपना हौसला नहीं खोने दिया। जब भी बात होती, मुस्कराते हुए अपने शरीर की परेशानियों को एक तरफ रख देते और मुझे हमेशा शुगर को लेकर हिदायत देते, बहुत प्यारे इन्सान, अभी पिछले कुछ दिन पहले ही तो बात हुई। यह अंतिम बात होगी सोचा न था। उनके जाने से साहित्य का एक पन्ना अधूरा ही रह गया... एक खालीपन जो कभी नहीं भरा जा सकेगा... यह साहित्य की बहुत बड़ी क्षति है। लोक साहित्यकार कृष्णचंद्र महादेविया का कहना है कि यशस्वी लेखक बद्री सिंह भाटिया के नि़धन का आकस्मिक समाचार हिमाचल के तमाम लेखकों को व्यथित कर गया। अनेक शारीरिक व्याधियों से दो चार होने के बावजूद भी बद्री सिंह भाटिया साहस और धैर्य के विरल व्यक्तित्व थे। उनकी कहानियों में हिमाचल की माटी की सुगंध पूरे देश में बिखरती रही। मिलनसार स्वभाव के भाटिया जी कहानी ही नहीं साहित्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन करते रहे। गिरिराज और हिमप्रस्थ के संपादक रहते हुए उन्होंने दोनों पत्र पत्रिकाओं में अपने संपादन का लोहा मनवाया। जुझारू और संवेदनशील भाटिया जी सदैव स्मृति में रहेंगे,विनम्र श्रद्धांजलि।

 

कथाकार एवं पत्रकार मुरारी शर्मा ने बद्री सिंह भाटिया के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर हिमाचल की कहानी की दस्तक देने वाले वरिष्ठ कथाकार बद्री सिंह भाटिया का जाना हिंदी कथा साहित्य केलिए अपूर्णीय क्षति है। वे गांव समाज से जुड़े कथा शिल्पी थे। वे आत्म प्रशंसा और प्रचार से कोसों दूर थे। कोरोना के कू्रर चक्र ने प्रिय कथाकार हमसे छीन लिया।

 

 

मुख्यमंत्री ने बद्री सिंह भाटिया के निधन पर शोक व्यक्त किया

 

 

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने राज्य के प्रसिद्ध लेखक और साहित्यकार बद्री सिंह भाटिया के निधन पर शोक व्यक्त किया है, बद्री सिंह भाटिया का आज दिल्ली में निधन हो गया। बद्री सिंह भाटिया सोलन जिले के अर्की क्षेत्र के निवासी थे। उन्होंने कविता, उपन्यास और लघु कथाओं पर सोलह से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। वह वर्ष 2005 में सूचना और जन संपर्क विभाग के प्रकाशन, हिमप्रस्थ संपादक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने और परिवार के सदस्यों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। निदेशक सूचना और जन सम्पर्क हरबंस सिंह ब्रसकोन और विभाग के अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी बद्री सिंह भाटिया के निधन पर शोक व्यक्त किया।

 

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