Saturday, October 17, 2026
BREAKING
• सीएम सुक्‍खू दिल्ली दरबार के क्‍यों लगा रहे बार-बार चक्कर: जयराम ठाकुर • कुंजुंम टनल बनाएगी सरकार, पहले होगा सर्वेः मुख्यमंत्री • केलांग में ICMR रिसर्च सेंटर का शिलान्यास, जयराम ठाकुर ने केंद्र के योगदान को सराहा • हिमाचल सरकार खिलाड़ियों के लिए आयोजित करेगी सम्मान समारोह • केंद्रीय विवि धर्मशाला में यूपीएससी और एचपीएससी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण 7 से • राज्यपाल ने महाराजा अग्रसेन के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया • सुक्खू सरकार की आपसी लड़ाई से हो रहा है प्रदेश का नुकसान: जयराम ठाकुर • न्याय का वास्तविक उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों तक न्याय सुनिश्चित करना: मुख्यमंत्री • हिमाचल मंत्रिमंडल ने खोला नौकरियों का पिटारा, 10962 पद भरेगी सुक्‍खू सरकार • एनआईटी हमीरपुर में शिक्षा महाकुंभ अभियान 6.0 को राज्‍यपाल ने किया संबोधित
 

ट्विटर को कोर्ट की दोटूक, काम करना चाहते हैं तो नियम मानने होंगे

एफ.आई.आर. लाइव डेस्क Updated on Thursday, July 29, 2021 14:52 PM IST
ट्विटर को कोर्ट की दोटूक, काम करना चाहते हैं तो नियम मानने होंगे

नई दिल्ली, 06 जुलाई। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को ट्विटर को आठ जुलाई तक यह बताने का निर्देश दिया कि नए आईटी नियमों के अनुपालन में वह स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति कब तक करेगा। ट्विटर ने उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि उसके द्वारा स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने इस बात पर नाराजगी व्यक्त की कि अदालत को यह सूचित नहीं किया गया था कि स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी (आरजीओ) की इससे पहले नियुक्ति केवल अंतरिम आधार पर थी जो इस्तीफा दे चुके हैं।

अदालत ने कहा कि ट्विटर ने अंतरिम आरजीओ को नियुक्त किया था और 31 मई को अदालत को इस बारे में भ्रम में रखा, उसे यह नहीं बताया कि अधिकारी की नियुक्ति अंतरिम आधार पर की गई है। न्यायाधीश ने कहा कि ‘यदि उन्होंने 21 जून को इस्तीफा दे दिया तो ट्विटर कम से कम इतना तो कर ही सकता था कि इन 15 दिन में किसी अन्य अधिकारी को नियुक्त करता, जब आप जानते थे कि इस मामले पर छह जुलाई को सुनवाई होनी है। आपको इस प्रक्रिया में कितना वक्त लगेगा? अगर ट्विटर को ऐसा लगता है कि मेरे देश में वह जितना समय चाहे ले सकता है, तो मैं इसकी इजाजत नहीं दूंगी।’

ट्विटर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सजन पूव्या ने कहा कि ट्विटर में अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। यह सच है कि अभी कोई मुख्य शिकायत निवारण अधिकारी, आरजीओ और नोडल संपर्क अधिकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि ‘जैसा कि अदालत ने कहा, हां इस वक्त ट्विटर ने नियमों का पालन नहीं किया है, लेकिन अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। जब एक मध्यस्थ नियमों का पालन नहीं करता तो वह सुरक्षित शरण संरक्षण खो देता है। निश्चित ही ट्विटर को नियमों का पालन करना चाहिए और वह करेगा भी। कृपया समुचित समय दें।’

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कहा कि नियम 25 फरवरी को अधिसूचित किए गए थे और मध्यवर्ती संस्थाओं को इनका पालन करने के लिए तीन महीने का वक्त दिया गया था, यह समयसीमा 25 मई को समाप्त हो गई। उन्होंने कहा कि ‘व्यवसाय करने के लिए भारत में उनका स्वागत है लेकिन यह रवैया देश की डिजिटल संप्रभुता के लिए अहितकर है।’ इस पर न्यायाधीश ने कहा कि ‘मैंने पहले ही उन्हें बता दिया है कि उन्हें नियमों का पालन करना होगा। मैं उन्हें कोई संरक्षण नहीं दे रही। अगर वे अनुपालन नहीं करते तो आप कार्रवाई के लिए स्वतंत्र हैं। मैं पहले ही स्पष्ट कर चुकी हूं कि अगर वे काम करना चाहते हैं तो उन्हें नियमों का पालन करना होगा।’

जब एएसजी ने कहा कि 42 दिन से नियमों का अनुपालन नहीं किया गया है और सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है, इस पर अदालत ने कहा कि ‘मुझे नहीं लगता कि ये दलील आप मेरे लिए दे रहे हैं।’ सुनवाई के दौरान अदालत ने कुछ देर के लिए कार्यवाही रोक दी और ट्विटर के वकील से इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा कि नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने में कितना समय लगेगा। हालांकि पुन: कार्यवाही शुरू होने पर पूव्या ने कहा कि दिल्ली और सैन फ्रांसिस्को (जहां ट्विटर इंक का दफ्तर है) में समय अलग-अलग होने की वजह से वह निर्देश नहीं ले सके हैं और कुछ वक्त और चाहिए।

अदालत ने आठ जुलाई तक का समय देते हुए कहा कि ‘उम्मीद की जाती है कि सुनवाई की अगली तारीख पर ट्विटर के वकील सभी अन्य जरूरतों के अनुपालन के संबंध में अपना स्पष्ट रुख रखेंगे।’ अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दावा किया गया कि माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर केंद्र सरकार के नये सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों का अनुपालन नहीं कर रहा।

VIDEO POST

View All Videos
X